सहकारी गन्ना विकास समितियॉं, उत्तर प्रदेश, भारत

गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग

हमारे बारे में

  महत्वपूर्ण व्यक्ति
श्री संजय भूसरेड्डी

प्रमुख सचिव, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, गन्ना एवं चीनी आयुक्त, उ० प्र०

वीरेन्द्र बहादुर सिंह

संयुक्त गन्ना आयुक्त

वर्तमान में गन्ना विकास विभाग के अन्तर्गत कुल 169 सहकारी गन्ना विकास समितियां व 28 चीनी मिल समितियाँ पंजीकृत व कार्यरत हैं। सहकारी गन्ना विकास समितियों व चीनी मिल समितियों का पंजीकरण गन्ना आयुक्त/निबन्धक सहकारी गन्ना/चीनी मिल समितियाँ उत्तर प्रदेश द्वारा उ.प्र. सहकारी समिति अधिनियम-1965 की धारा-7 के अन्तर्गत किया जाता है। वर्तमान में प्रदेश की गन्ना समितियों में 48.84 लाख गन्ना कृषक पंजीकृत है, जिनमें सेल लगभग 33 लाख गन्ना कृषक नियमित रूप से गन्ना समितियों के माध्यम से चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति करते है।गन्ना समितियाँ गन्ना किसानों व चीनी मिलों के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए जहाँ एक ओर सदस्य गन्ना कृषकों द्वारा उत्पादित गन्ने की आपूर्ति सम्बन्धित चीनी मिलों को निर्धारित समयावधि में कराते हुए सरकार द्वारा घोषित गन्ना मूल्य दर के अनुसार भुगतान कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं वहीं प्रदेश की संचालित 116 चीनी मिलों में निर्बाध गति से पूर्ण पेराई क्षमता पर गन्ने की उपलब्धता सुनिश्चित कराकर मिल संचालन में पूर्ण सहयोग करती है।

उपरोक्तानुसार वर्णित प्रमुख कार्यों के अतिरिक्त गन्ना समिति गन्ना किसानों को उच्च गुणवत्ता के कृषि निवेशों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के साथ ही साथ गन्ना विकास हेतु सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय सहयोग करती हैं तथा निम्नांकित उद्देश्यों की पूर्ति करती हैं :-

  • सदस्य गन्ना कृषकों के मध्य गन्ना खेती के आधुनिक व वैज्ञानिक विधियों को पम्पलेट, प्रदर्शनी, कृषक मेलों एवं गोष्ठियों के माध्यम से प्रचारित-प्रसारित कराना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों को पौधशाला से उत्तम गन्ना बीजों का वितरण एवं समिति क्षेत्रान्तर्गत गोदामों को स्थापित कर या किराये पर लेकर गुणवत्ता पूर्ण खाद, उर्वरक, कीटनाशक दवाओं का वितरण सुनिश्चित कराना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों के हितों की रक्षा करना।
  • गन्ना उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने हेतु आवश्यक कृषि निवेशों हेतु पूंजी का प्रबन्ध करना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों में मितव्ययिता, आत्मबल, पारस्परिक सहायता की भावना, प्रेमव्यवहार, व्यापार कुशलता एवं नैतिकता की उन्नति करना एवं सहकारिता के अन्य उद्देश्यों को अग्रसर करना।
  • ऐसे अन्य कार्य करना जो उपर्युक्त उद्देश्यों के प्रसंग में हो और उनकी पूर्ति करने में सहायक हो।
  • सरकार द्वारा निर्धारित नीतियों के अनुसार सदस्य गन्ना कृषकों की गन्ना आपूर्ति हेतु गन्ना सर्वेक्षण, बेसिक कोटा आगणन, सट्टाआगणन, कैलेण्डरिंग एवं पर्ची निष्कासन की व्यवस्था करना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों को अन्य फसलों की उपज में उन्नति कराना और उनके लिये उत्तम बीज का प्रबन्ध कराना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों की आर्थिक, शैक्षिक, सामाजिक तथा स्वास्थ्य संबंधी दशाओं में उन्नति के लिये साधन प्रस्तुत करना/कराना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों के रहन-सहन में उन्नति करने तथा अत्युत्तम बनाने के लिये साधारणतया उनकी सहायता करना तथा उनको सुविधायें उपलब्ध कराकर उनकी आय में अपेक्षित वृद्धि कराना।

गन्ना समितियों के मुख्य कार्य

प्रदेश की सहकारी गन्ना विकास समितियों के मुख्य कार्य निम्नवत है

  • गन्ना कृषकों में गन्ने की वैज्ञानिक खेती के प्रति अभिरूचि पैदा करना तथा उन्हें गन्ना समिति का सदस्य बनाना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों को यथावश्यक कृषि निवेश-उर्वरक, कीटनाशक व यंत्र आदि उपलब्ध कराना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों को नाबार्ड योजनान्तर्गत कृषि निवेश हेतु ऋण उपलब्ध कराना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों को अनुदान पर कृषि निवेश उपलब्ध कराना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों के गन्ने का सर्वे, सट्टा, अतिरिक्त सट्टा एवं पर्ची वितरण कराकर चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित कराना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों के आपूर्ति गन्ने का चीनी मिलों से गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित कराना।
  • सदस्य गन्ना कृषकों को केन्द्र एवं राज्य सरकार की गन्ना विकास योजनाओं का लाभ दिलाना।