शक्कर विशेष निधि

गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग

हमारे बारे में

  महत्वपूर्ण व्यक्ति
श्री संजय भूसरेड्डी

प्रमुख सचिव, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, उ0 प्र0 एवं गन्ना एवं चीनी आयुक्त, उ० प्र०

श्री भुवनेश कुमार अरविन्द

उप गन्ना आयुक्त

उ.प्र. गन्ना क्रयकर अधिनियम 1961 यथासंशोधित अधिनियम 1995 की धारा 3-10 के अन्तर्गत शक्कर विशेष निधि का गठन किया गया है। जिसके अन्तर्गत चार उपनिधियां उ.प्र. गन्ना अनुसंसाधन एवं विकास निधि, उ.प्र. शक्कर फैक्ट्रियां पुनः स्थापन, आधुनिकीकरण एवं स्थापना निधि, गन्ना मूल्य भुगतान हेतु चीनी मिलों को ऋण सहायता निधि एवं कल्याण निधि बनाई गई है। इन निधियों में धनराशि की व्यवस्था हेतु राज्य सरकार को क्रयकर के रूप में रू 2.0 प्रति कुन्तल की दर से गन्ने की खरीद पर चीनी मिलों से प्राप्त होने वाली धनराशि से की जाती है। राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष क्रयकर के रूप में प्राप्त धनराशि का 50 प्रतिशत राज्य सरकार की संचित निधि से इन निधियों में स्वीकृत किये जाने का प्रावधान है। जिसका प्रत्येक निधि में निम्नानुसार वितरण किया जाता है-

  • क्रयकर के 50 प्रतिशत में से 36 प्रतिशत उ0प्र0 गन्ना अनुसन्धान एवं विकास निधि को।
  • क्रयकर के 50 प्रतिशत में से 24 प्रतिशत उ0प्र0 शक्कर फैक्ट्रियां पुनः स्थापन आधुनिकीकरण एवं स्थापना निधि को।
  • क्रयकर के 50 प्रतिशत में से 30 प्रतिशत गन्ना मूल्य भुगतान के लिए ऋण सहायता निधि को।
  • क्रयकर के 50 प्रतिशत में से 10 प्रतिशत गन्ना एवं चीनी उद्योग विकास एवं श्रमिक कल्याण निधि को।

उपरोक्त चारों निधियों का अनुरक्षण एवं प्रवर्तन एक समिति में निहित होगा जो उ0प्र0 शक्कर विशेष निधि समिति कही जायेगी जिसमें निम्नलिखित व्यक्ति होंगे अर्थातः-

  • प्रमुख सचिव, उ0प्र0शासन, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग जो समिति के अध्यक्ष एवं संयोजक होंगे।
  • गन्ना आयुक्त, उत्तर प्रदेश।
  • सचिव, उ0प्र0शासन, वित्त विभाग या उसका नाम निर्देशित जो संयुक्त सचिव से अनिम्न स्तर का हो।

उल्लेखनीय है कि माल एवं सेवाकर (GST) लागू होने के कारण क्रय कर अधिनियम, 1961 एव क्रय कर की वसूली की व्यवस्था दिनांक 01.07.2017 से समाप्त हो चुकी है। जिसके कारण अब शक्कर विशेष निधि एवं इससे सम्बन्धित प्रावधान समाप्त हो चुके हैं।

उ.प्र. गन्ना शोध परिषद, उ.प्र. गन्ना किसान संस्थान एवं कार्यालय गन्ना आयुक्त के अधीन शक्कर विशेष निधि/प्रचार निधि अधिष्ठान जो पूर्व में शक्कर विशेष निधि से पोषित थे, उनके वित्त पोषण हेतु शक्कर विशेष निधि के स्थान पर वर्तमान में “उ.प्र. गन्ना शोध, विकास एवं प्रशिक्षण अनुदान” की व्यवस्था की गई है। जिसके माध्यम से इन संस्थाओं को राज्य सरकार बजट उपलब्ध करा रही है।